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सुधांशु मित्तल ने वामपंथी पत्रकारों को किया बेनकाप, मीडिया का असली खेल उजागर हुआ

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हाल ही में एक मीडिया चैनल और उसके पत्रकारों को लेकर जो बवाल मचा, उससे भारतीय मीडिया और पत्रकारों की बड़ी ही फजीयत हुई। अनेकों बुद्धिजीवियों ने अपनी-अपनी बात रखी और कुछ ने तो पत्रकारों का समर्थन भी किया।

ईसी मुद्दे पर भाजपा नेता और राजनैतिक जानकार सुधांशु मित्तल का एक लेख डेली पैयोनियर (Daily Pioneer) वेबसाइट पर प्राकाशित हुआ है। सुधांशु मित्तल के इस लेख ने मीडिया और पत्रकारिता के कई राज तो खिले ही, इसके अलावा मीडिया हॉउस और चैनलों को आइना भी दिखा दिया।



सुधांशु मित्तल लिखते हैं की “पत्रकारों की नियुक्ति और बर्खास्तगी ठीक वैसा ही है, जैसा किसी राजनैतिक पार्टी में कोसी नेता को लेना और निकाला जाना।” आगे सुधांशु मित्तल लिखते हैं की “देश के संविधान में चार स्तम्भ है। संविधान में चौथा स्तम्भ प्रेस अर्थात मीडिया है। हमारे देश में मीडिया को बहुत अधिक या यूं कहें की पूरी आज़ादी दी गई है।”

सुधांशु मित्तल लिखते हैं की ‘अब आज के समय में टेक्नालाजी ने एक अहम् योगदान अदा किया है। सोशल मीडिया अब 5 वे हिस्से का रोल अदा कर रहा है। सोशल मीडिया में खबर और विरोध के चलते मीडिया को मनमानी करने पर झुकना पड़ा है।’

हाल ही में ABP न्यूज़ और इसके पत्रकारों का मामला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। आपको ज्ञात होगा की पिछले दिनों ABP न्यूज़ पर गलत और भ्रामक खबर दिखाए जाने और फिर सरकार की आपत्ति के बाद 3 पत्रकारों को निकाला गया था।

एबीपी न्यूज़ के सम्पादक Milind Khandekar से इस्तीफ़ा ले लिया गया था और Abhisar Sharma को छुट्टी पर भेज दिया गया था। इसके साथ ही वरिष्ठ पत्रकार Punya Prasun Bajpai भी हटा दिया गया था।

पुण्य प्रसून बाजपेई के ABP News के शो ‘मास्टरस्ट्रोक’ को बहुत TRP मिला करती थी। किन्तु TV News शो पर सरकार विरोधी और PM मोदी विरोधी खबरें चलानें के आरोप कुछ लोग लगाते रहे थे और फिर जब एक खबर सच में गलत साबित हुई तब मीडिया चैनल को दवाब में यह कदम उठाना पड़ा था।



दरअसल हुआ यह की प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ शो के दौरान नःमो ऐप पर एक छत्तीसगढ़ की एक महिला ने बताया की प्रधानमंत्री के योजनाओ के वजह से आज उसकी इनकम डबल हो गयी है। अब इस औरत के इंटरव्यू के बाद ए.बी.पी न्यूज़ ने एक शो किया जहाँ न्यूज़ ने बताया की उस औरत को ऐसा बयान देने के लिए पैसे दिए गए थे। उस औरत ने पैसो के लिए झूठ बोला है।

फिर क्या था, चैनल क्र इस शो के बाद बीजेपी के मंत्रियो ने और सोशल मीडिया ने ए.बी.पी के इस खबर और शो का खंडन करना शुरु कर दिया। लोगों ने कहा की यह एक फेक न्यूज़ है। जो की फेक न्यूज़ ही साबित हुई और उस किसान महिला ने ABP news की खबर और पूण्य प्रसून बाजपेई के दावों की पोल खोल दी। उसके कुछ दिन बाद चैनल पर इतना दवाब पड़ा की मीडिया चैनल ने उक्त तीनों पत्रकारों को रिजाइन करवा दिया।

इस मुद्दे पर राजनैतिक विचारक सुधांशु मित्तल ने ‘The Pioneer बेबसाइट (www.dailypioneer.com) पर अपने लेख में लिखा है की “यह मीडिया ग्रुप एक कॉर्पोरेट कंपनी की तरह काम कर रहे हैं। ऐसे कई मीडिया चैनल और प्रेस को सही खबर से कोई सरोकार नहीं रहा है। यह तो बस अपना और अपने कुछ लोगों का एजेंडा भुनाने में लगे हुए हैं।”

सुधांशु मित्तल लिखते हैं की ‘जैसे मोटी सैलरी पर कोई कंपनी एक काम के कर्मचारी को रखती है, ठीक वैसे ही के मीडिया चैनल और प्रेस भी वैसा ही बिजीनेस फण्डा अपना रहे हैं। चैनल की साख को बचाने और फेक न्यूज़ दिखाये जाने के दाग को धोने के लिए यह पत्रकारों की बर्खास्तगी का ड्रामा रचा गया है।’



News Courtesy : The Pioneer (www.dailyPioneer.com)

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Nitin Chourasia
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