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ऐसा शिव मंदिर जो बार बार गायब हो जाता हैं, यहाँ पर विज्ञान भी हार जाता हैं: जानें रहस्य

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देवो के देव महादेव की महिमा अपरंपार है, जो भी उनकी शरण में आया उसके सारे दुखो का निवारण होना तय है। देश मे अनगिनती शिव मंदिर है, जिनसे जुड़ी अलग-अलग महिमा और कहानिया भी है। मंदिरो में होने बाले चमत्कार भी है। जो जानकर हमारे मन मे इस मंदिर को देखने की लालसा पैदा कर देता है। यहाँ पर भगवान शिव के मंदिर के साथ-साथ बाबा भोले नाथ की ज्योतिलिंग भी है।

जिनकी महिमा अपरंपार है बाबा भोलेनाथ के इन ज्योर्तिलिंग मंदिर से जुड़ी कहानियों, चमत्कार और वास्तुकला जो लोगो को आकर्षित करते रहे है। इसके अलग-अलग हिस्सों में भगवान भोलेनाथ के कई मंदिर है। जहाँ देश ओर विदेश से लोग बाबा भोलेनाथ के दर्शन करने आते है, लेकिन आपको बता दे, इन शिव मंदिरों में एक ऐसा शिव मंदिर है जहाँ पर भक्तों के आने की असली बजह मंदिर का गायब होना बताया जाता है। क्यो हो गए न हैरान? लेकिन आपको बता दे ऐसी रिपोर्ट है जिसमे बताया जाता है कि यह अनोखा शिव मंदिर दिन में 2 बार गायब हो जाता है अर्थात अदृश्य हो जाता है।




भारत के गुजरात में स्थित इस मंदिर का नाम है ‘स्तंभेश्वर मंदिर’। इस अनोखे मंदिर के बारे में कहा जाता है, कि भगवान शिव के अनेकों मंदिरों में से एक प्रसिद्ध मंदिर स्तंभेश्वर मंदिर की महिमा निराली है। भोलेनाथ के अलग अलग मंदिर है, जिनकी कहानिया हमे इस बात के संकेत देती है, कि इस धरती पर भगवान शिव की कृपा बरकार है। उनके इन्ही मंदिरो में से एक मंदिर स्तंभेश्वर मंदिर जो कि गुजरात शहर के बड़ोदरा शहर से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक गांव में है।

कहा जाता है महादेब का ये मंदिर कई बार गायब जो जाता है। ये मंदिर भारत के रहस्मय मंदिरो में से एक मंदिर है। गायब होने की बजह से स्तंभेश्वर महादेव मंदिर को गायब मंदिर भी कहा जाता है। वैसे इस मंदिर से जुड़ी कहानी सामने आती है। जिसमे बताया जाता है, कि इस मंदिर को गायब मंदिर क्यो कहा जाता है इस गायब मंदिर के पीछे एक अनोखी घटना छिपी हुई है।

रिपोर्ट में जो कहानी बताई जाती है उसकी मने तो ये घटना साल में कई बार देखने को मिलती है। जिसकी बजह से ये मंदिर अपने आप मे खास बन गया है। ये मंदिर अरब सागर में खम्बात की खाड़ी के किनारे स्थित है। समुद्र के बीच मे स्थित होने के कारण इस मंदिर की खूबसूरती देखने लायक है। समुद्र के बीच मे स्थित होने के कारण सुंदरता देव कहा जाता है।


Photo Credits: Twitter Handle SanatanPath

यहाँ पर समुद देवता स्वयं शंकर भगवान का जलाभिषेक करते है। लहरो के समय शिवलिंग पूरी तरह जल मग्न हो जाता है। ये परम्परा सदियों से चलती आ रही है। शिवलिंग का आकार 4 फिट ऊँचा और 2 फिट घेरे बाला है। इस मंदिर के दर्शन लहरो के समय ही किये जा सकते है दरसल ऊंची लहरो के समय यह मंदिर पानी मे डूब जाता है।



पानी मे डूब जाने की बजह से ये मंदिर दिखाई नही देता इसलिए इस मंदिर को गायब मंदिर कहा जाता है। ऊँची लहरो के खत्म होने पर पानी मंदिर के धीरे-धीरे नीचे उतरता है ऒर मंदिर दिखने लगता है। इस मंदिर का निर्माण कुमार कार्तिकेय ने तारकाशुर नामक राछस का वध करने के बाद किया था।शिव मंदिर की खोज लगभग 150 साल पहले हुई थी।

अगर आप इस मंदिर को देखने जाए तो कहा जाता है की एक दिन और रात का खाना रखना पड़ता है साथ मे ताकि आप वहाँ होने वाले चमतकारी दृश्य को देख सके। सुबह के समय लहरो का प्रभाव कम रहता है। तो मंदिर के अंदर जाकर शिवलिंग के दर्शन किये जा सकते है। शाम से रात के समय लहरो का प्रभाव ज्यादा रहता है, जिसकी वजह से मंदिर को पानी मे डुबाते हुए देखा जा सकता है।

जिस बजह से शिवलिंग के दर्शन नही हो पाते है। सुबह ओर शाम ये मंदिर आंखों से ओझल हो जाता है। शिवपुराण में इस मंदिर का उलेखय मिलता है।
इस मंदिर से अरब सागर का सुंदर नजारा दिखाई पड़ता है। यहाँ भक्तो को पर्चे बाटे जाते है। जिसमे ज्वारभाटा आने का समय लिखा रहता है। जिससे यहाँ आये किसी भी भक्तो का किसी भी प्रकार से कोई नुकसान न हो।


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Nitin Chourasia
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