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राम मंदिर अयोध्या के लिए ट्रस्ट बनाने का दौर शुरू हुआ, अब इस समिति पर होगी ज़िम्मेदारी: Uploader Leaks

Ram Mandir Trust Ayodhya News
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अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद सरकार ने राम मंदिर बनाने के लिए ट्रस्ट बनाने के काम को प्रारम्भ कर दिया है। सरकार के सूत्रों के अनुसार सरकार ने अधिकारियों की एक समिति का गठन किया है जो कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का गहराई से परीक्षण कर रही है। इसके साथ कानून मंत्रालय और अटॉर्नी जनरल की ओर से उन्हें कानूनी सलाह भी दी जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को ऐतिहासिक निर्णय में एक सदी से अधिक पुराने मामले का निपटारा करते हुए अयोध्या में विवादित जमीन पर राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ कर दिया है। न्यायालय से मिली जानकारी के मुताबिक विवादित 2.77 एकड़ जमीन अब केंद्र सरकार के रिसीवर के पास रहेगी, जो इसे सरकार द्वारा बनाए जाने वाले ट्रस्ट को सौंप देंगे।

पीठ ने केंद्र सरकार से मांग की थी कि वह मंदिर निर्माण के लिए तीन महीने के अंदर एक ट्रस्ट बनाए। जिससे मंदिर निर्माण में कोई रुकावट ना आये। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मत निर्णय दिया और कहा कि हिंदुओं का यह भरोसा अटूट है कि विवादित संबंधित जमीन पर ही भगवान राम का जन्म हुआ था तथा वह प्रतीकात्मक रूप से जमीन के स्वामी हैं।



सुप्रीम कोर्ट से फैसला आते है राम मंदिर निर्माण का काम जोर पकड़ लिया है। मंदिर निर्माण में 2 साल से कम का समय लग सकता है। अभी वर्तमान समय मे मंदिर 50% बनकर तैयार हो गया है। मंदिर 2 मंजिल इमारत का बना होगा। मंदिर निर्माण के लिए दान देने वालो का तांता लग गया है। पटना के महावीर स्वामी मंदिर ने हर साल 2 करोड़ रुपये देने की बात कही है। 5 साल तक वो 10 करोड़ रुपये राशि मंदिर निर्माण में देंगे।

रामलला के हित में निर्णय आने के बाद भरतपुर के बयाना और बंशी पहाड़पुर के खनन इलाके से पत्थर की आपूर्ति फिर Start हाे जाएगी। राम जन्म भूमि मंदिर बनाने में न्यास की ओर से प्रस्तावित मंदिर में इलाके से निकलने वाले सेंड स्टोन का उपयोग 60 प्रतिशत से ज्यादा होगा। मंदिर निर्माण में करीब 4 लाख घन फीट पत्थर उपयोग होगा, जिसमें से लगभग 2.5 लाख घन फीट बंशीपहाडपुर का स्टोन इस्तेमाल किया जायेगा।

वर्ष 2006 से अयोध्या के कारसेवक पुरम में पत्थर भेजने का काम चल रहा है। अभी तक 1 लाख घन फीट पत्थर की आपूर्ति हो चुकी है। इसमें 70 हजार घन फीट पत्थर अयोध्या की राम मंदिर कार्यशाला बनाने में तथा 30 हजार घन फीट पत्थर पिंडवाड़ा की कार्यशाला में पहुचाया जा चुका है। यहां पत्थर की नक्काशी का काम किया जा रहा है।




इसके लिए संबंधित खान मालिकों से विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी टच में बने रहते है। विश्व हिंदू परिषद के विभाग अध्यक्ष सतीश भारद्वाज ने इसकी पुष्टि की है। सिर्रोंध, महलपुर चूरा, छऊआमोड और तिर्घरा इलाको की खानों के पत्थर का परीक्षण करने के बाद चयनित किया गया है। यहां सहकारी समितियों और खान मालिकों से ब्लॉक निकालकर बयाना पहुचाने काे कहा गया है।

यहां रफ माल की छटाई के और कटिंग होने के बाद अयोध्या भेजा जाएगा। पत्थर की आपूर्ति 6 माह तक पूरी हो पायेगी। 10 से 20 ट्रोला पत्थर हर महीने भेजा जाएगा। इसके लिए विश्व हिंदू परिषद द्वारा कुछ ट्रोले स्थाई रूप से रेंट पर लिए जाएंगे। बंशी पहाड़पुर के पत्थर की महत्वपूर्ण बात उनकी मजबूती और सुंदरता के कारण सदियों से मशहूर है।

इसमें अन्य पत्थरों के तुलना अधिक भार सहने की क्षमता और सरलता से पच्चीकारी होने की अहम वजह के कारण इसकी हमेशा से डिमांड रही है। अक्षरधाम, संसद, इस्कान के अधिकांश मंदिरों, लालकिला, बुलंद दरवाजा सहित कई प्रसिद्ध मंदिरों और इमारतों में बंशी पहाड़पुर का पत्थर लगा है। पत्थर कारोबारी नेमीचंद ने कहा कि इस पत्थर में रुनी मतलब स्टोन कैंसर नहीं होता। बारिश से पत्थर के रंग में कोई परिवर्तन नही आता है बल्कि निखार आती है।


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Nitin Chourasia
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