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PM मोदी के पकोड़े वाले बयान पर यह खबर जानकर आपके होश उड़ेंगे और भूख लग जायगी

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POST BY : UPLOADER LEAKS

पीएम मोदी ने हाल ही में कहा था कि क्या ‘पकौड़े’ बेचकर 200 रुपये प्रति दिन कमाने वाले किसी व्यक्ति को बेरोजगार माना जा सकता है। ऐसे में केंद्र सरकार की खिल्ली उड़ाते हुए बेंगलुरु में एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने पकौड़े का स्टॉल लगाया है। इन लोगों ने शहर में कई जगह पकौड़े बनाकर बांटे भी।

इनका कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी ने पकौड़ा बेचने को रोज़गार बताकर नौकरी तलाश रहे लोगों का मज़ाक उड़ाया है। पर के कार्यकर्ता यह नही देख पाये की वे सभी पकोडे – समोसे वालो का मज़ाक उड़ा रहे हैं। क्या पकोडे या समोसे बेचना कोई ग़लत या छोटा काम है ? आज अपलोडर लीक्स टीम आपको PM मोदी के बयान और पकोडें के बिज़्नेस से अवगत करवाने जा रही है।



पीएम मोदी के इस बयान पर सोशल मीडिया पर काफी बवाल मचा था। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने भी PM मोदी पर निशाना साधते हुए था कि अगर पकौड़े बेचना नौकरी है तो फिर भीख मांगने को रोज़गार के विकल्प के तौर देखना चाहिए। कांग्रेस सांसद शशि थरूरने भी पीएम मोदी के इस बयान की आलोचना की थी और कहा, जिसने कहा कि न खाऊंगा और न खाने दूंगा वो आज पकौड़े की बात करने लगे हैं। वो नहीं समझते कि लोग चाय और पकौड़े इसलिए बेच रहे हैं।

मूर्खों #धिरुभाई_अम्बानी भी #पकोड़े ही बेचते थे पहले😉निकम्मो, कुछ सीखो उनके जीवन से, भीख माँगना बंध करो और मेहनत मज़दूरी करो 😂

Posted by Kajal Shingala on Friday, 2 February 2018

गुजरात में दंगे करवाने वाला कथित पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने भी पीएममोदी पर उनकी पकौड़े वाली बात को लेकर हमला बोला। पटेल ने ट्वीट करते हुए पीएम मोदी को चायवाला कहा है। कथित पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने लिखा, ‘बेरोजगार युवाओं को पकौड़े का ठेला लगाने का सुझाव एक चायवाला ही दे सकता है। अर्थशास्त्री ऐसा सुझाव नहीं देता।’ अब अपलोडर लीक्स टीम हार्दिक की हेकड़ी निकालते हुये पकोडे या समोसे के असली बिज़्नेस के बारे मे आपको अवगत करवाने जा रही है।

पहले मुंबई के इस बंदे की कहानी जान लें।

मुंबई के रहने वाले मुनाफ कपाडिया ने समोसे बेचने के लिये गूगल की नौकरी छोड़ दी। मुनाफ ने एमबीए की पढाई की थी। अन्य जगह पर नौकरी करने के बाद मुनाफ ने परदेस का रूख किया। विदेश में कुछ कंपनियों में इंटरव्यू देने के बाद गूगल में इनको नौकरी मिल गई। जून 2011 में उन्होंने गूगल में सेल्स डिपार्टमेंट में ज्वाइन किया, लेकिन इस नौकरी को छोड़ दिया।

आईटी फील्ड में काम करने वाले किसी भी शख्स से पूछ लीजिए, गूगल जैसी कंपनी में काम करना उसका सपना होगा। गूगल में नौकरी करने का मतलब है पूरी जिंदगी शान और आराम से जीना। मुनाफ कपाड़िया के फेसबुक प्रोफाइल के बायो में लिखा है कि “मैं वो व्यक्ति हूं जिसने समोसा बेचने के लिए गूगल की नौकरी छोड़ दी।” उनके समोसे की भी खासियत है कि वह मुंबई के पांच सितारा होटलों और बॉलिवुड में खासा लोकप्रिय है।

मुनाफ ने एमबीए की पढ़ाई की थी और कुछ सालों तक गूगल में नौकरी करने के बाद मुनाफ को लगा कि, वह इससे बेहतर काम कर सकते हैं। बस फिर क्‍या था, दिमाग में बिजनेस का नया आईडिया लेकर वह घर लौटे और उन्‍होंने यहां अपना बिजनेस शुरू कर दिया।

मुनाफ का घर जिस इलाके में है वहां ज्यादातर मध्यमवर्गीय फैमिली के लोग रहते और वे खुद भी मध्यमवर्गीय फैमिली से है। लेकिन जिस लेवल का आइडिया मुनाफ ने सोचा था उस हिसाब से उन्हें यहां ग्राहक मिलना मुश्किल था। इसलिए मुनाफ ने प्रयोग के तौर पर अपने 50 दोस्तों को ईमेल और मैसेज किया और उन्हें खाने पर बुलाया।

फिर समोसे और पकोडे के काम स्टार्ट करते हुए एक रेस्‍टोरेंट डाल दिया कमाई अची होने लगी तो और बड़ा रेस्‍टोरेंट हो गया जी. मुनाफ अब भारत में ‘द बोहरी किचन’ नाम का रेस्‍टोरेंट चलाते हैं। उनकी मां नफीसा टीवी देखने की काफी शौकीन हैं, उन्हें फूड शो देखना काफी पसंद था और इसलिए वह खाना भी बहुत अच्छा बनाती थीं। इससे मुनाफ को बल मिला, उन्होंने रेस्टोरेंट खोलने का प्लान बनाया और वह इस सपने को पूरा करने में लग गए। अभी उनके रेस्टोरेंट को खुले सिर्फ 2 साल हुआ है और उनका टर्नओवर 75 लाख पहुंच गया है। मुनाफ इसे अगले कुछ सालों में 3 से 5 करोड़ तक पहुंचाना चाहते हैं।

मुनाफ की स्‍टोरी और उनका काम इतना फेमस हुआ कि फोर्ब्‍स ने अंडर 30 अचीवर्स की लिस्‍ट में उनका नाम शामिल कर लिया है। मुनाफ अपनी कंपनी के सीईओ हैं, लेकिन यहां इसका मतलब चीफ ईटिंग ऑफिसर होता है। मुनाफ के रेस्टोरेंट में इतनी भीड़ होती है कि यहां खाने के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ता है।

मुनाफ अभी मुंबई के वर्ली इलाके से फूड की डिलिवरी करते हैं। लेकिन आने वाले समय में वह इसी नाम से कुछ और रेस्टोरेंट खोलना चाहते हैं। अपनी सफलता का पूरा श्रेय मुनाफ अपनी मां को देते हैं। मुनाफ़ और मोदी दोनो की लाइफ मे माँ का भरपूर आशीर्वाद है और हाँ इन दोनो की माँ किसी राजनैतिक पार्टी की नेता या अध्यक्ष भी नही रही है।

आइए जाने पकोडे की फैक्ट्री के बारे मे-

पकोडे की फैक्ट्री यानी जहां पर इन्हें बहुत अधिक मात्रा में तैयार किया जाता है। पकोडे, समोसा व कचैड़ी की फैक्ट्री भी केक फैक्ट्री की तरह होती है। जहां पर बहुत अधिक मात्रा में इन्हें तैयार किया जाता है और शहर के विभिन्न जगहों में सप्लाई दी जाती है। आजकल शहरों में अच्छे कारीगरों की कमी और जगह की कमी होने की वजह से रेस्टोरेंट, होटल, नाश्ते की दुकानों में पकोडे,समोसा व कचैड़ी बनाने की बजाएं दूसरों को आॅर्डर देकर बनवाते हैं।



इन होटलों व रेस्टोरेंट के अलावा स्कूल, काॅलेज, हाॅस्पीटल आदि में कैंटीन की बढ़ती संख्या की वजह से दिन-प्रतिदिन इसकी डिमांड बढ़ रही है। आपको पकोडे, समोसा व कचैड़ी बनानी आती है तो अच्छी बात है, यदि नहीं आती है तो कुछ अच्छे कारीगरों को अपने साथ जोड़कर पकोडे,समोसा व कचैड़ी की फैक्ट्री शुरू कर सकते हैं।

आपके यहां तैयार पकोडे, समोसा व कचैड़ी स्वादिष्ट और स्वाद में नयापन होगा तो आॅर्डरों की संख्या बढ़ते देर नहीं लगेगी। यदि आप पकोडे,समोसा व कचैड़ी की फैक्ट्री शुरू करना चाहते है तो सबसे पहले ऐसे जगह का चुनाव करे जो शहर के लगभग बीचों बीच में हो। जिससे आपको पूरा शहर कवर करने में आसानी होगी।

पकोड़े अगर थोड़े तीखे होंगे तो जादा बिकेंगे और ऑनलाइन बुकिंग-होम डिलीवरी रही तो आप एक साल में अडानी-अम्बानी बन जाओगे।🍢🍡😂

Posted by Nitin Chourasia on Thursday, 1 February 2018

पकोडे, समोसा व कचैड़ी की मार्केटिंग के लिए शुरूआत में आप स्कूल, काॅलेज, हाॅस्पिटल, सरकारी व गैरसकारी आॅफिसों आदि जगहों के केंटिग वालों से संपर्क करें और उन्हें पकोडे, समोसा व कचैड़ी की फैक्ट्ररी की जानकारी देते हुए उनसे आॅर्डर बुक करें. रेस्टोंरेट, छोटे-छोटे नाश्ते की दुकानों, किराणा स्टोर आदि जगहों से भी आप संपर्क करके उनसे भी आॅर्डर बुक करवा सकते हैं। पब्लिसिटी के लिए आप सोशल मीडिया जैसे वाट्सएप, फेसबुक आदि का सहारा ले सकते हैं।

कई बार बर्थडे पार्टी, प्रमोशन पार्टी, या गैट टू गैदर,कालेजो की फ्रेशर पार्टी या फेयरवेल पार्टी आदि के दौरान पकोडे, समोसा या कचैड़ी आॅर्डर पर ही मंगवाएं जाते है। आपकी फैक्ट्री की पब्लिसिटी होने से माह में दो-चार आॅर्डर इस तरह से अतिरिक्त आपको मिलते रहेंगे। वैसे आपकी पकोडे की फैक्ट्री का प्रचार तो हमारी टीम Uploaderleaks भी कर देगी, आप पकोडे बनाइए तो सही।

बड़े शहरों में ही नहीं छोटे शहरों में भी आप पकोडे, समोसा या कचैड़ी की फैक्ट्ररी खोल सकते हैं। बड़े शहर में जहां आपको अधिक पैसों की जरूरत होगी वहीं छोटे शहरों में कम खर्च पर भी आप इसे शुरू कर सकते हैं। पकोडे, समोसा व कचैंड़ी फैक्ट्ररी आप छोटी सी जगह से भी शुरू कर सकते है चाहे तो आप इसे घर से भी शुरू कर सकते हैं। तो अब आप लॉगी को पकोडे की फैक्ट्री के बारे मे समझ आ ही गया होगा। क्या राहुल गाँधी जी के आलू की फैक्ट्री वाली बात समझ आई थी ? ये कॉमेंट बॉक्स मे ज़रूर बताना।

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