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महाराष्ट्र जातीय हिंसा के बीच क्या नारे लगे और किसका झंडा देखा गया, मीडीया क्यो नही दिखाता? Video

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POST BY : UPLOADER LEAKS

भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं सालगिरह पर सोमवार को पुणे में हिंसा भड़क गई थी। इस घटना के बाद महाराष्ट्र के कई जिलों में तनाव फैलने की खबर है। एहतियात के तौर पर स्टेट रिज़र्व पुलिस (SRP) की चार टुकडियां तैनात की गई। कई इलाकों में ऑफिस, स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए हैं। लोकल सेवा भी प्रभावित हुई।

पुणे के पास भीमा-कोरेगांव लड़ाई की 200वीं सालगिरह पर आयोजित कार्यक्रम में दो गुटों की हिंसा में एक शख्स की मौत हो गई थी। इसके बाद हिंसा मुंबई, पुणे, औरंगाबाद, अहमदनगर जैसे 18 शहरों तक फैल गई। बहुजन महासंघ, महाराष्ट्र डेमोक्रेटिक फ्रंट, महाराष्ट्र लेफ्ट फ्रंट समेत 250 से ज्यादा दलित संगठनों ने बुधवार को महाराष्ट्र बंद का एलान किया था।

आपको बता दें की पुणे में भीमा-कोरेगांव युद्ध की 200वीं सालगिरह पर हुई जातीय हिंसा के मामले में गुजरात के नवनिर्वाचित निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी और जेएनयू देशविरोधी नारे मामले से चर्चित हुए छात्रनेता उमर खालिद के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जिग्नेश मेवानी और उमर खालिद ने कार्यक्रम के दौरान भड़काऊ भाषण दिया था, जिसके चलते दो समुदायों में हिंसा हुई।

आपको बता दें कि भीमा कोरेगांव की लड़ाई 1 जनवरी 1818 को पुणे स्थित कोरेगांव में भीमा नदी के पास उत्तर-पू्र्व में हुई थी। यह लड़ाई महार और पेशवा सैनिकों के बीच लड़ी गई थी। अंग्रेजों की तरफ 500 लड़ाके, जिनमें 450 महार सैनिक थे और पेशवा बाजीराव द्वितीय के 28,000 पेशवा सैनिक थे, मात्र 500 महार सैनिकों ने पेशवा की शक्तिशाली 28 हजार मराठा फौज को हरा दिया था।

हर साल नए साल के मौके पर महाराष्ट्र और अन्य जगहों से हजारों की संख्या में पुणे के परने गांव में दलित पहुंचते हैं, यहीं वो जयस्तंभ स्थित है जिसे अंग्रेजों ने उन सैनिकों की याद में बनवाया था, जिन्होंने इस लड़ाई में अपनी जान गंवाई थी। कहा जाता है कि साल 1927 में डॉ. भीमराव अंबेडकर इस मेमोरियल पर पहुंचे थे, जिसके बाद से अंबेडकर में विश्वास रखने वाले इसे प्रेरणा स्त्रोत के तौर पर देखते हैं।

कुल मिला के इस लड़ाई में फायदा तो अंग्रेजो का ही हुआ था। पेशवा (मराठों) से लड़ने वाले तो अंग्रेज़ थे बस इनकी सेना में दलित हिन्दू (भारतीय) नौकरी कर रहे थे। इस तरह से अंग्रेजों की फ़ूट डालो शासन करो की नीती सफल हो गई । किन्तु आज अंग्रेजों से आज़ादी के इतने साल बाद यह फ़ूट फिर क्यों भड़क गई ? कही कोई बड़ा षड्यंत्र जान पड़ता है।

पोस्टकार्ड डॉट न्यूज़ में प्रकाशित खबर के अनुसार महाराष्ट्र जातीय हिंसा एक सोची समझी चाल है और तो और दलित समारोह मे जानबूझ कर हिंसा करवाई गई है। महाराष्ट्र जातीय हिंसा के बीच क्या क्या हुआ यह एक यूज़र ने सोशल मीडीया में वीडियो के मध्यम से दिखाया है।

जैसा की आप जानते ही हैं की मीडिया और लोग इस जातीय हिंसा का आरोप गुजरात के दलित नेता और हाल ही में विधायक बने जिग्नेश मेवानी और JNU छात्र नेता उमर खालिद पर लगा रहे हैं। इस दोनों ने ही भड़काऊ भासन देके लोगो को भड़काया और आंग में घी डालने का काम किया।

JNU छात्र नेता उमर खालिद तो आपको याद ही होगा जिसके इशारे पर मे भारत की बर्बादी और भारत तेरे टुकड़े होंगे वाले नारे लगे थे और बहुत बबाल भी हुआ था। भीमा कोरेगांव मे भी JNU छात्र नेता उमर खालिद मौजूद था और हिंसा के दौरान वाले नारे उपद्रव के दौरान लगाए गये।

सोशल मीडीया पर एक यूज़र द्वारा भीमा कोरेगांव हिंसा के दौरान का एक वीडियो पोस्ट किया गया है, जिस वीडियो मे यह देशविरोधी नारा “Chheen ke lenge azadi” आप सुन सकते हैं। अब यह नारा लगाने वाले देश के दलित नागरिक तो नही हो सकते हैं-


Every last vestige of it being a “Dalit protest” disappears on hearing These JNU slogans of “Chheen ke lenge azadi”

एक दूसरे वीडियो मे भी उक्त उपद्रवी देखे जा सकते हैं और साथ ही ऐसे नारे लगाए जा रहे हैं, जिसकी आप देश के किसी भी नागरिक फिर चाहे वो किसी भी जाती का हो से अपेक्षा नही करेंगे।

इस वीडियो मे जो झंडे लहराये जा रहे है उनमे से कुछ झंडे दलित संगठन या हिंदू संगठन के नही लग रहे बल्कि किसके हैं वो आप वीडियो मे देख सकते हैं । साथ ही हिंसा के दौरान यह नारा लगाया जाना बहुत बड़े षड्यंत्र को दर्शाता है इस वीडियो मे अगर आप ध्यान से नारा सुन लें तो आपका बी पी बढ़ जाएगा, नारा है- “Neem ka Patta Kadwa hai, Narendra Modi B***** hai”

Koregaon Bhima shocking slogans video leaked. What shocking slogans chanted during Dalit protest? Were They Fake or real ?

इस खबर को पढ़कर और ये दोनो वीडियो देख कर आप समझ ही गये होंगे की महाराष्ट्र जातीय हिंसा किसी बड़े षड्यंत्र का नतीज़ा है और दलित उपद्रव की आड़ में वाले नारे लगना मतलब डाल मे कुछ काला नही बल्कि पूरी दाल ही काली है। खेर वक्त रहते सच सबको पता चल ही जाएगा किंतु जो नुकसान हुआ उसकी भरपाई कों करेगा ज़नाब ?

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Nitin Chourasia
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