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बनारस में मिल गया विश्वनाथ मंदिर का वो प्राचीन गेट। PM मोदी के KVT Project के दौरान हुई घटना VIDEO

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अगर यह सवाल पूछा जाये की भारत की सबसे बड़ी और सबसे ज्यादा पूजनीय जगह कौन की है तो उत्तर मिलेगा काशी मतलब बनारस। कहा जाता है की बनारस में साक्षात शिव शंकर भोलेनाथ बस्ते हैं और यहाँ पर भी बाबा बोलनाथ का अति प्राचीन मंदिर और ज्योतिर्लिंग काशी विश्वनाथ है। जैसा की सभी जानते हैं की मुग़ल औरंगज़ेब ने बनारस पर हमला करके प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर के भाग को तोड़कर उसमे मस्जित बनवा दी थी। फिर वक़्त बदला और काशी में फिर से हिन्दू रीती रिवाज़ से पूजा होने लगी।

बनारस में रहने वाले और दर्शन को जाने वाले लोगो ने यह देखा होगा की कशी विश्वनाथ मंदिर के ठीक बगल में एक मस्जित है। असल में वह मस्जित भी प्राचीन मंदिर का एक भाग है। कहा जाता है की एक अति प्राचीन शिवलिंग भी उस मस्जित के नीचे दफ़न है। अब आज 2018 में भारत के प्रधानमंत्री और बनारस से सांसद नरेंद्र मोदी जी ने एक प्रोजेक्ट शुरू करवाया, जिसका नाम है श्री काशी विश्वनाथ कॉरीडोर प्रोजेक्ट।



PM मोदी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट में 400 मीटर के दायरे में विकाश और कुछ निर्माण कार्य होना है जिसकी लागत 450 करोड़ की आंकी गई है। PM Modi के इस Dreem Project Kashi Vishvanath Corridor Project का कुछ लोगो ने जमकर विरोध किया। क्योंकि इस KVT Project में 175 कब्जाधारी घरों और इमारतों का अधिग्रहण किया जा रहा था। कुछ लोगो को यह ठीक नहीं लग रहा था तो विरोध होने लगा।

किन्तु अब जब 175 घरो और इमारतों को सरकार ने कब्ज़े में लेकर कार्य चालू किया तो पता चला की इन इमारतों के अंदर अति प्राचीन मंदिर मिल रहे हैं। सैकड़ो साल पहले ही लोगो ने इन मंदिरों पर कब्ज़ा मारकर मंदिरो के ऊपर छत बनाकर लेंटर डाल दिया और मंदिर को घक दिया था। किसी को बाहर से दीखता ही नहीं था की घर, इमारत और गलियों के अंदर प्राचीन मंदिर छिपा है।



मोदी के KVT Project के कारण एक ऐसी खोज हो गई जो अब तक नहीं हो पाई थी। यहाँ पर अधिग्रहण करने पर कशी विश्वनाथ मंदिर का वो प्राचीन गेट भी मिल गया, जिसका वर्णन कशी खंड में मिलता है। प्राचीन समय में भक्त इसी विशाल दरवाज़े से होते हुए विश्वनाथ मंदिर जाया करते थे। बाबा विश्वनाथ मंदिर दर्शन के लिए इस गेट से होते हुए जाने की प्रथा थी।

इस गेट को ऊपर से छत बनाकर धक् दिया गया था और मकान और इमारतें बना दी गई थी। सरकारी अघिकारी और कमिश्नर के अनुसार 175 इमारतों के अधिग्रहण में अभी तक 41 छोटे और बड़े मंदिर मिल चुके हैं। जिनमे से 6-7 मंदिर तो विशेष महत्त्व वाले हैं जिनका वर्णन काशी खंड में मिलता है और विख्यात पंचकोशी परिक्रमा के मार्ग में होने के प्रमाण रहे थे।

वह मंदिर भी मिल गया जहाँ तुलसीदास जी ने तप किया था। उस मंदिर पर दिवाल बनाकर उसके नीचे से बाथरूम की सीवर लाइन का पाइप बना दिया गया था। एक और मंदिर मिला गुप्त कालीन। उस मंदिर में भी कब्ज़ा मारकर मंदिर के पीछे शौचालय बनाकर मंदिर के नीचे से गटर की सीवर लाइन दाल दी गई थी। मतलब सैकड़ो सालो से इतने पूजनीय और प्राचीन महत्त्व वाले मंदिर के साथ खिलवाड़ और अपमान हो रहा था।




चाहे कांग्रेस सरकार हो या सपा सरकार या बसपा सरकार, सबसे अन्देखी की। आज PM नरेंद्र मोदी बनारस सांसद और योगी आदित्यनाथ उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री ना होते तो यह सच शायद ही कभी सामने आ पाता? यह प्राप्त मंदिर पंचकोशी परिक्रमा के मार्ग में आने वाले मंदिर रहे थे। जिसका वर्णन काशी खंड में पाया जाता है। मोदी के इस प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ कॉरीडोर में इसी पंचकोचि परिक्रमा और प्राचीन मार्ग का ध्यान रखते हुए निर्माण की योजना है।

News 18 को अधिकारी ने बताया की इन प्राप्त मंदिरो की जांच और कार्बन डेटिंग करवाई जायगी और इनको इनकी महत्वता के अनुसार सुधार कार्य करवाकर इनकी सुदरता को पुनः जीवित किया जायगा। जो लोग इस KVT Project का अब तक विरोध कर रहे थे अब वे चुप नज़र आ रहे हैं। धर्म की नागरी में अधर्म हो रहा था तब यह लोग मौन थे और सहभागी भी थे इस अधर्म के।

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Nitin Chourasia
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