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हरियाणा की छोरियां अब छोरो से कम नही, हेवी लाइसेंस लेकर बस चला रही दो बहनें, मां को गर्व है।

Haryana Lady Bus Driver
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हर बेटी पर माता पिता को गर्व होता है अब चाहे शिक्षा के क्षेत्र में हो, खेल के क्षेत्र में हो हर जगह बेटीयो ने अपनी जीत के झंडे गाढ दिए है। माता पिता बेटियों के हौसलों की नींव होते है। नीव मजबूत होती है तो होसलो में उड़ान अपने आप भर जाती है। बेटीयो ने आज साबित कर दिया है कि बेटियां भी बेटो से कम नही है।

अगर किसी काम को पूरी शिद्दत से किया जाए, तो सारी कायनात एक जुट होकर उसको पूरा करने में जुट जाती है, ये डायलॉग फिल्मो में बहुत सुने है, लेकिन ये असल जिंदगी में भी सही साबित होते है। यही हरियाणा की बेटियों ने साबित कर दिया कि छोरियां छोरों से कम नही। रोहतक शहर की एकता कालोनी में रहने वाली दो बहने रीना हुड्डा व मीना हुड्डा महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन गई हैं।

मेक द फ्यूचर ऑफ कंट्री संस्था से जुड़कर दोनों बहनें बस चला रही हैं। इनका काम है जो झुग्गी-झोपडिय़ों में बच्चे पढ़ाने के लिए जाते है प्रतिदिन उनको लाने ले जाने के काम की जिम्मेदारी इन्ही पर है। बस चलाने के अतिरिक्त ये बच्चों को टयूशन पढ़ाकर खुद भी पढ़ती है। दोनों बहने इग्नू से मास्टर ऑफ सोशल वर्क की शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। गरीबी इनके बीच दीवार नही बनी गरीबी की दीवार को चीरते हुए इन्होंने अपने सपनो को पूरा करने की राह में निकल पड़ी।

बचपन में ही पिता का स्वर्गवास हो गया तंग। माता ने हार नही मानी कठिन परिश्रम कर अपने बच्चों को पाला। गरीबी के चलते बेटे ने अपनी मां का काम मे हाथ बंटाकर उनका सहारा बने। छोटी सी उम्र से ही भाई ने घर की जिम्मेदारी उठानी शुरू कर दी। बेटियों को सशक्त बनाने के लिए मां ने उन्हें पढ़ाया। पैसा ना होने के कारण मा अपनी बेटियों को अच्छे स्कूल नही भेज सकी, लेकिन फिर अपनी बेटियों की शिक्षा के लिए उन्हें एमटीएफसी संस्था में प्रवेश दिलाया।

मां का निर्णय बेटीयो की जिंदगी में रौशनी की किरण बनकर आई। पढ़ाई के साथ साथ दोनो बहनो ने स्कूटी, बाइक और कार चलानी सीखी। संस्था के संचालकों व अध्यापकों ने मीना का हौसला बढ़ाया और उसने हरियाणा रोडवेज के रोहतक प्रशिक्षण केंद्र पर हैवी व्हीकल लाइसेंस के लिए आवेदन किया। करीब एक महीने के सफलतापूर्वक प्रशिक्षण के बाद अप्रैल 2018 में लाइसेंस मिला। ऐसा करने वाली वह रोहतक की पहली महिला बनी हैं।




रीना भी बहादुरगढ़ के प्रशिक्षण केंद्र से हैवी लाइसेंस प्राप्त करने वाली पहली महिला बनी। जब वो रोहतक केंद्र गई तो वहाँ 3 महीने को वेटिंग थी उन्होंने बिना देर किए बहादुरगढ़ जाकर वहां से आवेदन भर दिया। रीना और मीना की माँ को उन पर गर्व है।

जब उनको बस चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा था, तब वह 100 पुरुषों में एक अकेली महिला थी जो इस काम को करने आई थी। उन्होंने अपने हौसले को कम नही होने दिया और सभी लड़के उनके इस काम को देखकर उनका मजाक उड़ाया करते थे। लेकिन उन्होंने हार नही मानी, और अपने काम को आगे बढ़ाया।



प्रशिक्षण के बाद होने वाले जरूरी ट्रायल में पहली ही बार में उन्होंने एग्जाम पास कर लिया। उन्होंने बताया कि झुग्गी-झोपडिय़ों में रहने बच्चों को पढ़ाने के लिए ऑटो रिक्शा से लाना व वापस छोडऩा पड़ता था, जिसमे बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। एक बार मे सारे बच्चे नही आ पाते थे कुछ छूट जाते थे। संस्था के प्रयासों को देखते हुए समाजसेवी राजेश जैन ने बस भेंट की।

रीना व मीना का कहना है कि मां और दोनों भाईयों ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया, कभी उनको हारने नही दिया। गरीबी भी उनके इरादों को तोड़ नही पाई। जब दोनों बहनों ने बस चलाने की बात कही तो भाइयो ने आगे बढ़कर उनके हौसले को बढ़ाया। बहनो ने अपनी सफलता का श्रेय एमटीएफसी के संचालक नरेश ढल, तस्वीर हुड्डा, मनीषा अग्रवाल को दिया हैं। जिन्होंने उनके होसलो को जान दी, उनको कामयाबी बनाने में उनका साथ दिया।


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Nitin Chourasia
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