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राहुल गाँधी ने माना की GST अच्छा आइडिया है पर विरोध की वजह जानके आप सिर पकड़ लेंगे

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POST BY : UPLOADER LEAKS

बस कुछ ही दिन बाद नोटबंदी के एक साल 8 नवंबर को पूरे हो जाएंगे। कांग्रेस मोदी सरकार को पूरी तरह से घेरने की तैयारी में है। कॉंग्रेस और शहज़ादे राहुल गाँधी इस मामले में सरकार का विरोध क्यों करना चाहते हैं? इस पर कोई सही ज़वाब नही मिल पा रहा है। जबकि कॉंग्रेस और शहज़ादे राहुल गाँधी के बयानों से ऐसा लगने लगा है कि विरोधी दल होने के कारण उनका उद्देश्य सरकार के फैसले का विरोध करना है।

विरोध करने की राजनीति के उद्देश्य से ही वे इसका विरोध कर रहे हैं। मीडिया से बातचीत करते हुए राहुल गाँधी ने खुद माना कि जीएसटी (GST) देश के लिए एक अच्छा आइडिया है। लेकिन उनको सरकार का विरोध करना है ऐसे में वह सरकार पर यह भी इल्जाम लगा रहे हैं कि जीएसटी को सही तरीके से लागू नहीं किया गया और भाजपा ने इस सोच को नष्ट कर दिया।

जबकि जीएसटी का विरोध करने वाले हर दल के नेता को यह समझना होगा कि जीएसटी लागू करने का फैसला केवल केंद्र सरकार का नहीं था इसमें हर राज्य की सरकार की सहमति अनिवार्य थी और उसके बाद ही इस फैसले को लागू करने का फैसला केंद्र सरकार की तरफ से लिया गया।

नोटबंदी का विरोध कर रही कांग्रेस को यह भी समझना होगा की अगर सरकार का यह फैसला भी गलत था तो देश की जनता ने सरकार के इस फैसले का विरोध क्यों नहीं किया। नोटबंदी की अवधि में तमाम तकलीफों के बावजूद भी सरकार के इस फैसले के साथ देश की जनता खड़ी नजर आई।

देश की जनता ने उस दौरान मीडिया के सामने आकर खुलकर कहा था कि इस फैसले से तकलीफ तो हो रही है। लेकिन यह फैसला उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार की तरफ से लिया गया है ऐसे में जनता सरकार के इस फैसले के साथ खड़ी है। विरोधी पार्टियों ने पूरे देश में जनता को इसके विरोध में आने का आह्वान भी किया लेकिन सरकार के फैसले के खिलाफ कोई भी आंदोलन सड़क पर नहीं हुआ। जनता ने सरकार का पूरा सहयोग किया।

कांग्रेस की सोच सवालों के घेरे में है कि अब भी वह सरकार के नोटबंदी और जीएसटी के फैसले को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश क्यों कर रही है। जबकि इसी बीच गुजरात और हिमाचल में विधानसभा चुनाव के लिए भी प्रचार कार्य जोरों पर है। ऐसे में कांग्रेस की तरफ से सरकार के फैसले का विरोध क्यों किया जा रहा है, तो क्या यह मान लिया जाय की कॉंग्रेस के आस कोई मुद्दा नही है तो चुनाव का बिल नोटबंदी और जीएसटी पर ही फाड़ दिया जाये ?

राहुल गांधी ने कहा कि पीएम देश का दुख नहीं समझ पाए। उन्‍होंने देश को नोटबंदी और जीएसटी के रूप में दो झटके दिए। बकौल राहुल गांधी, पहले नोटबंदी और फिर जीएसटी बम गिराए। उन्‍होंने कहा कि आठ नवंबर देश के लिए दुख का दिन है। इसी दिन नोटबंदी का फैसला लिया गया था। वहीं राहुल गांधी ने जीएसटी को अच्‍छा आइडिया बताया, मगर कहा कि भाजपा ने इसे नष्‍ट कर दिया।

आगे राहुल ने कहा कि पंजाब के हमारे वित्त मंत्री ने जीएसटी पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया और बताया कि एक अच्छे आइडिया को कितनी खराब ढंग से लागू किया गया। उन्होंने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी दो लगातार हमले सरकार की तरफ से जनता पर किए गए। जिसने भारत की अर्थव्यवस्था को ध्वस्त कर दिया।

आख़िरकार राहुल ने माना की नोटेबंदी और जी एस टी अच्छा आइडिया है पर कॉंग्रेस के शहज़ादे होने के नाते विरोध करना तो बनता है, मतलब विरोध करना मजबूरी है राहुल गाँधी की ठीक उस कहावत के जैसे की ‘मजबूरी का नाम महात्मा गाँधी’ !

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Nitin Chourasia
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